13 अक्टूबर 2026 से 23 लाख से ज्यादा खसरे पेंडिंग, PV ऐप ने बढ़ाया विवाद – सरकार मौन, जनता परेशान
जनभूमि/रायपुर/मुंगेली – छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब जनसंकट बन गई है। पिछले 13 दिनों से राजस्व विभाग की रीढ़ माने जाने वाले पटवारी काम पर नहीं हैं और इसका खामियाजा सीधे आम आदमी भुगत रहा है। तहसीलों में ताले, खेतों में गिरदावरी अधूरी और ऑनलाइन पोर्टल पर पेंडिंग फाइलों का अंबार लग गया है।
जनता की जुबानी – हकीकत ग्राउंड से
किसान रो रहा है – “धान सूख रहा है, पंजीयन नहीं हो रहा”
गरियाबंद के किसान लोकराम साहू कहते हैं, “धान काटकर खलिहान में पड़ा है, समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए गिरदावरी सुधार कराना है, पर पटवारी नहीं है। PV ऐप में एंट्री नहीं होने से फार्मर ID ही नहीं बन रही। अगर समय पर नहीं बिका तो व्यापारी औने-पौने दाम में ले जाएगा।”
प्रदेश में 23.67 लाख खसरों की एंट्री पेंडिंग है, जिसमें धान के ही 10.56 लाख खसरे शामिल हैं।
3. जमीन खरीदी-बिक्री ठप – “रजिस्ट्री कराई, नाम नहीं चढ़ रहा”
बिलासपुर के रमेश कहते हैं, “जमीन की रजिस्ट्री करा ली, पर नामांतरण के बिना बैंक लोन नहीं दे रहा। पटवारी हड़ताल में हैं तो फाइल वहीं अटकी है।”
पटवारी क्यों हैं नाराज?
पटवारी संघ के 4 साफ कारण हैं:
- PV ऐप की नाकामी: जंगल-खेत में नेटवर्क नहीं, बिना नक्शे के सर्वे का दबाव, फसलों के बीच जंगली जानवरों का खतरा।
- दमनात्मक कार्रवाई: हड़ताल से पहले बलौदाबाजार और महासमुंद में तबादले-निलंबन ने आग में घी डाला।
- वेतन विसंगति: सालों से 2800 ग्रेड पे की मांग लंबित।
- पदोन्नति नहीं: राजस्व निरीक्षक के पद पर प्रमोशन नहीं हो रहा।
सरकार क्या कर रही है?
सरकार ने पटवारियों का काम तहसीलदारों को थमा दिया, लेकिन अब तहसीलदार संघ भी बगावत पर है। संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है – “हम पहले से ही हजारों न्यायिक केस में दबे हैं, खेत में जाकर फसल नापना हमारा काम नहीं।”
भू-अभिलेख संचालक से बैठक भी बेनतीजा रही। पटवारियों का आरोप है कि सरकार सुनने की बजाय “काम पर लौटो वरना इस्तीफा दो” की धमकी दे रही है।
असर – एक नजर में
- 32 लाख में से 23 लाख खसरे पेंडिंग
- आय, जाति, निवास के 50 हजार से ज्यादा आवेदन अटके
- धान खरीदी की तैयारी पर ब्रेक
- किसान कांग्रेस ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
अब आगे क्या?
संघ ने ऐलान किया है कि जब तक PV ऐप की दिक्कतें दूर नहीं होतीं, निलंबन-तबादले वापस नहीं होते और वेतन-पदोन्नति पर लिखित आदेश नहीं आता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
सवाल यही है – जब पटवारी और तहसीलदार दोनों मैदान छोड़ देंगे, तो छत्तीसगढ़ का राजस्व कौन संभालेगा? और इसका खामियाजा कब तक आम जनता भुगतेगी?

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