जनभूमि डेस्क:–मुंगेली/पूरे प्रदेश में विधानसभा,लोकसभा और नगरीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत कर पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चुनावी जीत के बाद कार्यकर्ताओं को यह उम्मीद थी कि नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनित पार्षद) की नियुक्ति के माध्यम से उन्हें संगठन और सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाएगा। लेकिन भाजपा को सत्ता में काबिज होने के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी निकायों में एल्डरमैनों का मनोनयन नहीं होने से कार्यकर्ताओं में निराशा और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार द्वारा नगरीय निकायों में एल्डरमैनों की नियुक्ति परंपरागत रूप से इसलिए की जाती रही है ताकि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान,जिम्मेदारी और अवसर मिल सके। एल्डरमैनों को पार्षद के समान ही विकास कार्यों के लिए फंड तथा मानदेय की सुविधा मिलती है। इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है,बल्कि निकायों में सरकार की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में भी मदद मिलती है।
प्रदेशभर में नई नगर परिषदों को बने लगभग 1 वर्ष से ज्यादा समय होने जा रहे हैं। नगर निगम महापौर,नगर पंचायत अध्यक्ष,नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षद अपने-अपने वार्डों में विकास कार्य प्रारंभ कर चुके हैं। इसके बावजूद एल्डरमैनों की नियुक्ति अब तक नहीं होने से उन कार्यकर्ताओं में खासा असंतोष है,जिन्होंने एल्डरमैन बनने का सपना संजोए रखा था और चुनाव के दौरान पूरी निष्ठा से पार्टी के लिए काम किया।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने अपने-अपने स्तर पर पूरी ताकत झोंक दी थी। संगठन और जनप्रतिनिधियों की ओर से उन्हें लगातार आश्वासन भी मिले,लेकिन नियुक्ति में हो रही देरी से अब बेचैनी बढ़ती जा रही है। फरवरी माह में जिन नगरीय निकायों में चुनाव हुए,उनके अनुसार नगर निगमों में वार्ड के अनुपात में,नगर निगमों में आठ,नगर पालिकाओं में पांच तथा नगर पंचायतों में तीन एल्डरमैनों की नियुक्ति होनी है लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।
निकायों के निर्वाचित पार्षदों के बीच भी यह चर्चा आम हो चली है कि इस बार शायद एल्डरमैनों की नियुक्ति न हो। न तो संगठन स्तर पर और न ही शासन स्तर पर किसी प्रकार की सक्रियता नजर आ रही है। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि एल्डरमैन नियुक्ति की प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
कुछ भाजपा नेताओं का कहना है कि साय सरकार के गठन के बाद दो नए मंत्रियों की नियुक्ति हो चुकी है। इसके अलावा निगम,मंडल और बोर्डों में भी नियुक्तियां की जा चुकी हैं तथा पार्टी द्वारा विभिन्न संगठनों में पदाधिकारियों का विस्तार भी लगातार किया जा रहा है। इसके बावजूद नगरीय निकायों में एल्डरमैनों की नियुक्ति को लेकर असमंजस बना हुआ है।
यदि शीघ्र ही इस दिशा में निर्णय नहीं लिया गया तो इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ सकता है। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और यही निराशा धीरे-धीरे नाराजगी में बदलती जा रही है। अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार और संगठन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर कब तक खरे उतरते हैं।

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