जनभूमि–कोरबा/ द्वापर युग में राजा परीक्षित को भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से अपनी माता के गर्भ में ही उनके दिव्य दर्शन प्राप्त हुए थे। वे बड़े ही भाग्यशाली थे, क्योंकि जिन भगवान के दर्शन के लिए संत-महात्मा जप, तप और साधना करते हैं, उन्हीं परब्रह्म परमात्मा के दर्शन उन्हें जन्म से पहले ही हो गए थे। यह बातें श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन अयोध्यापुरी पावर सिटी कोरबा में व्यासपीठ से आचार्य किशोर शर्मा ने कही।
परमेश्वर प्रसाद तिवारी के निवास में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य किशोर शर्मा ने राजा परीक्षित और शुकदेव जी की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित को उनकी माता उत्तरा के गर्भ में ही भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन हुए थे।
आचार्य शर्मा ने कहा कि जब अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित को मारने का प्रयास किया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें बचाने के लिए अपने दिव्य रूप से गर्भ में प्रवेश किया और उन्हें संरक्षण प्रदान किया। इस दौरान भगवान ने अपने विराट स्वरूप के दर्शन भी कराए। यह घटना भगवान श्रीकृष्ण की महानता और उनकी भक्ति की शक्ति का अद्भुत उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि परीक्षित का जन्म महाभारत युद्ध के बाद हुआ था। उनके पिता अभिमन्यु और माता उत्तरा थीं। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से ही उनका जीवन सुरक्षित रह सका।
आचार्य किशोर शर्मा ने कहा कि इस कथा से यह संदेश मिलता है कि भगवान की सच्ची भक्ति और उनकी कृपा से असंभव भी संभव हो सकता है। भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में साथ खड़े रहते हैं।
इस अवसर पर पं. विकास शर्मा, पं. हरिश पांडेय, किशन चतुर्वेदी, विनोद उपाध्याय, प्रदीप तिवारी, योगेश तिवारी, सूर्यकांत मिश्रा, आयुष द्विवेदी, अंकित तिवारी, पूर्व एल्डरमेन भुनेश्वर तिवारी सहित विप्र परिवार और कॉलोनी के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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