जनभूमि–मुंगेली/राजनीति के पन्नों पर मुंगेली जिले का नाम आज स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। यह शायद जिले के इतिहास में पहली बार हुआ है जब सत्ता के शीर्ष पर मुंगेली का इतना गहरा दबदबा हो। प्रदेश में उपमुख्यमंत्री के रूप में अरुण साव,अजेय योद्धा के रूप में अपनी पहचान बना चुके विधायक पुन्नूलाल मोहले और केंद्र की मोदी सरकार में राज्य मंत्री तोखन साहू—ये तीन रत्न आज मुंगेली की पहचान हैं। लेकिन विडंबना देखिए,जिस जिले ने देश और प्रदेश को इतने कद्दावर नेता दिए,वहां की आम जनता आज एक अदद स्वास्थ्य सुविधा के लिए तरस रही है।
सत्ता का रसूख बनाम जनता की बेबसी
विधानसभा और लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद मुंगेली की जनता को उम्मीद थी कि अब विकास की गंगा बहेगी और मूलभूत सुविधाओं के लिए उन्हें पड़ोसी जिलों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। लेकिन हकीकत इसके उलट है। जिला अस्पताल में करीब 4 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक सिटी स्कैन मशीन स्थापित की गई है। तकनीकी रूप से मशीन तैयार है,सेटअप पूर्ण है,बस कमी है तो एक ‘फीता काटने’ वाले दो हाथ की। पिछले 3 महीनों से यह मशीन नेताओं के इंतजार में सफेद हाथी बनी खड़ी है,जबकि गरीब मरीज निजी केंद्रों में मोटी रकम देने या बिलासपुर तक की दौड़ लगाने को मजबूर हैं।
उद्घाटन की बाट जोहती मशीन,नेताओं की व्यस्तता का बहाना
जनता के बीच चर्चा है कि जिले के तीन बड़े चेहरों के पास इस मशीन का शुभारंभ करने का समय नहीं है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू की व्यस्तताएं देश के अन्य राज्यों के चुनावों में बताई जा रही हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल क्षेत्रीय विधायक पुन्नूलाल मोहले पर खड़ा हो रहा है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि अस्पताल उनके अपने क्षेत्र में आता है और वे अधिकांश समय मुंगेली में ही रहते हैं,फिर भी वे इस जनहित के कार्य की शुरुआत करने में असहज क्यों नजर आ रहे हैं? क्या सत्ता के गलियारों में कोई ऐसा अदृश्य दबाव है जिसने स्थानीय विधायक के हाथ बांध रखे हैं?
पांच बार टला कार्यक्रम,जनता में पनप रहा भारी आक्रोश
विश्वस्त सूत्रों और स्थानीय लोगों की मानें तो अब तक उद्घाटन के कार्यक्रम को 5 बार टाला जा चुका है। हर बार प्रोटोकॉल और नेताओं की उपलब्धता का बहाना बनाकर तारीखें आगे बढ़ाई जाती रहीं। नेताओं की इस ‘राह’ को देखते-देखते मशीन पर धूल की परतें जमने लगी हैं। राजनेताओं के लिए यह महज एक फीता काटने का कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन उन मरीजों के लिए यह जीवन-मरण का प्रश्न है जो आर्थिक तंगी के कारण अपना इलाज नहीं करा पा रहे हैं।
खामोशी के पीछे बड़े तूफान की आहट
मुंगेली की जनता फिलहाल खामोश है,लेकिन यह खामोशी संतुष्टि की नहीं,बल्कि गहरे आक्रोश की है। आमजन का कहना है कि उन्होंने इन प्रतिनिधियों को इसलिए चुना था ताकि जिले की तकदीर बदले,न कि इसलिए कि मशीनें उद्घाटन के अभाव में कबाड़ बनें। जिले के ‘तीन रत्नों’ की चमक के बीच आम आदमी की ये तकलीफ आगामी समय में चुनावी धरातल पर बड़े विरोध के रूप में सामने आ सकती है। जनता अब किसी आश्वासन की नहीं,बल्कि अपनी बारी और अपने हक के क्रियान्वयन का इंतजार कर रही है।

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