जनभूमि–मुंगेली/ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव के गृह जिले मुंगेली में चल रहे विकास कार्य अब सवालों के घेरे में आ गए हैं। शहर को नई पहचान देने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे भव्य स्वागत द्वारों की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आपत्ति जताते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे है।पूरे निर्माण कार्यों में तय तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
3.63 करोड़ की लागत से बन रहे पांच स्वागत द्वार
नगर पालिका परिषद मुंगेली के अंतर्गत शहर के पांच प्रमुख मार्गों पर भव्य स्वागत द्वारों के निर्माण के लिए शासन द्वारा अधोसंरचना मद से 3 करोड़ 63 लाख 73 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य शहर को आकर्षक पहचान देना है। निर्माण कार्य की शुरुआत रायपुर रोड से की गई है, जिसका ठेका मेसर्स रूप केशरी कंस्ट्रक्शन को दिया गया है।
हालांकि, शहरवासियों का कहना है कि जिस उम्मीद के साथ यह योजना शुरू हुई थी, उसका परिणाम जमीन पर वैसा नजर नहीं आ रहा।
लाखों की लागत, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल
रायपुर रोड पर निर्माणाधीन स्वागत द्वार को लेकर नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, डिजाइन और फिनिशिंग देखकर यह साफ प्रतीत होता है कि गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि जब लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो निर्माण कार्य भी उतना ही मजबूत और आकर्षक होना चाहिए। नागरिकों ने सवाल उठाया है कि क्या इस तरह का निर्माण आने वाले समय में सुरक्षित और टिकाऊ रह पाएगा?
अधिकारियों की उदासीनता, ठेकेदार की मनमानी
नागरिकों के बीच यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि नगर पालिका परिषद के अधिकारी निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी नहीं कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि अधिकारी फील्ड में जाकर निरीक्षण करने के बजाय केवल औपचारिकता निभा रहे हैं।
इसी का फायदा उठाकर ठेकेदार मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं और शासन द्वारा स्वीकृत बजट का सही उपयोग नहीं हो पा रहा। जनता का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं की गई तो करोड़ों रुपये की यह परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकती है।
डिप्टी सीएम से हस्तक्षेप की मांग
भ्रष्टाचार की आशंका और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चिंतित मुंगेली के जागरूक नागरिकों ने अब सीधे उपमुख्यमंत्री अरुण साव से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों ने मांग की है कि विकास कार्यों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष निगरानी समिति का गठन किया जाए, जो निर्माण स्थलों पर जाकर कार्यों की जांच करे और तय मानकों का पालन सुनिश्चित कराए।
नागरिकों का कहना है कि यह जनता के टैक्स का पैसा है और इसका उपयोग तभी सार्थक होगा जब निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण और भ्रष्टाचार मुक्त हों।

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