जनभूमि–मुंगेली/प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव की मंशा मुंगेली को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की थी,जिसके तहत उन्होंने शहर के सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्यों के लिए करोड़ों की सौगात दी। लेकिन,इस नेक इरादे पर अब स्थानीय भ्रष्टाचार की काली छाया पड़ गई है। मुंगेली के पुराना बस स्टैंड स्थित ‘आगर खेल परिसर’ का जीर्णोद्धार इन दिनों विकास के बजाय ‘भ्रष्टाचार की भेंट’ चढ़ता नजर आ रहा है। 90 लाख रुपये की लागत से हो रहे इस निर्माण कार्य को लेकर उठे गंभीर सवालों ने नगर पालिका प्रशासन और निर्माण एजेंसी की मिलीभगत की पोल खोल दी है।
निर्माण कार्य या’घटिया सामग्री’ का प्रदर्शन?
शासन के अधोसंरचना मद से स्वीकृत इस महत्वपूर्ण परियोजना की जिम्मेदारी ‘मेसर्स अभिमान ट्रेडर्स,अकलतरा’ को सौंपी गई है। लेकिन काम शुरू होते ही ठेकेदार की मंशा पर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर जिस तरह की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है वह स्पष्ट रूप से गुणवत्ता के मानकों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि निर्माण कार्य में पुरानी रेत का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। नींव से लेकर गैलरी तक के निर्माण में तकनीकी मानकों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है,जिससे भविष्य में इस परिसर की सुरक्षा पर भी संकट गहरा गया है।
इंजीनियरों की ‘आंखें बंद’,ठेकेदार बेखौफ
इस पूरी परियोजना में नगर पालिका के इंजीनियरों की भूमिका सबसे अधिक संदेहास्पद बनी हुई है। इस कार्य के लिए जिन्हें ‘प्रभारी’ नियुक्त किया गया है वे धरातल पर निरीक्षण के नाम पर पूरी तरह नदारद हैं। क्या इंजीनियरों की यह चुप्पी ठेकेदार के साथ उनकी किसी ‘मिलीभगत’ का संकेत है? यह सवाल अब शहर की फिजाओं में गूंज रहा है। यदि निर्माण में तकनीकी खामियां हैं,तो विभाग अभी तक मूकदर्शक क्यों बना हुआ है? आम जनता का सीधा आरोप है कि यह जनता के टैक्स का पैसा है जिसे अधिकारी और ठेकेदार मिलकर बंदरबांट करने में जुटे हैं।
‘फोटोबाजी’ की राजनीति और जनता का अपमान
शहर के विकास के लिए चुने गए जनप्रतिनिधियों और अन्य जिम्मेदार नेताओं का व्यवहार भी इस मामले में बेहद निराशाजनक रहा है। विकास कार्यों का जायजा लेने और गुणवत्ता की निगरानी करने के बजाय,नगर के अधिकांश जनप्रतिनिधि केवल ‘फोटोबाजी’ और श्रेय लेने की राजनीति में मशगूल हैं।
जनता के बीच आक्रोश है कि जब काम शुरू होता है,तब तो नेता मंचों पर दिखाई देते हैं,लेकिन जब काम में भ्रष्टाचार हो रहा होता है,तब उन्हें ‘फुर्सत’ नहीं मिलती। आम जनता जिन्हें चुनकर सत्ता के शिखर तक पहुंचाती है वे चुनाव जीतने के बाद जनता की समस्याओं को भूलकर केवल अपने और अपने करीबियों के हित साधने में लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि “हम खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं,क्योंकि हमारे द्वारा दिए गए टैक्स के पैसों का दुरुपयोग सीधे तौर पर हो रहा है।”
क्या शासन प्रशासन जागेगा?
आगर खेल परिसर,जो कभी मुंगेली की पहचान हुआ करता था,आज भ्रष्टाचार के दाग झेलने को मजबूर है। सवाल यह है कि क्या प्रदेश के मुखिया और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पर संज्ञान लेंगे? क्या ठेकेदार और लापरवाह इंजीनियरों पर कोई कार्रवाई होगी,या फिर यह फाइल भी अन्य फाइलों की तरह फाइलों के बीच ही दबकर रह जाएगी?
मुंगेली की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। वे ठोस कार्रवाई,निर्माण की उच्च-स्तरीय जांच और भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त दंड की मांग कर रहे हैं। यदि समय रहते इस खेल पर लगाम नहीं कसी गई,तो यह ‘विकास’ का कार्य शहर के लिए एक ‘दुस्वप्न’ बनकर रह जाएगा।

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