पार्किंग में मीटर धधका, ऊपर पढ़ रहे थे बच्चे; मीटर के पास जनरेटर और इमरजेंसी एग्जिट को लेकर गंभीर सवाल
जनभूमि/मुंगेली :–शहर के अचार्य इंस्टीट्यूट में बिजली के मीटर में लगी आग ने संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस वक्त पार्किंग में बिजली के मीटर से आग की लपटें और धुआं उठ रहा था, उसी दौरान संस्थान के प्रथम एवं द्वितीय तल पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे थे। आग और धुआं दिखाई देने के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया और बच्चों में दहशत फैल गई।
गनीमत रही कि आग बड़े स्तर पर नहीं फैली और किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है। लेकिन घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि यदि आग कुछ देर और विकराल रूप ले लेती तो क्या संस्थान में मौजूद विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालने की पर्याप्त व्यवस्था थी?
पार्किंग में मीटर के पास जनरेटर, हादसा बढ़ने का खतरा
सबसे गंभीर सवाल संस्थान की पार्किंग में बिजली के मीटर और जनरेटर की व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि जिस क्षेत्र में बिजली के मीटर लगाए गए हैं, उसी के आसपास जनरेटर भी मौजूद हैं।
ऐसे में विद्युत मीटर से शुरू हुई आग यदि जनरेटर या आसपास रखे अन्य सामान तक पहुंच जाती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। शिक्षण संस्थान में जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद रहते हैं, वहां विद्युत उपकरणों की सुरक्षित एवं मानकों के अनुरूप व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।
एक रास्ता, आपात स्थिति में बच्चों की सुरक्षा कौन करेगा?
घटना के बाद संस्थान में इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विद्यार्थियों के आने-जाने के लिए मुख्य रूप से एक ही संकरा रास्ता है। ऐसे में आग, धुआं या किसी अन्य आपात स्थिति में यदि मुख्य रास्ता बाधित हो जाए तो विद्यार्थियों के बाहर निकलने का वैकल्पिक रास्ता क्या है?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आग की स्थिति में कुछ ही मिनटों में भगदड़ और दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में केवल मुख्य प्रवेश-निकास पर निर्भर रहना कितना सुरक्षित है, इसकी जांच संबंधित विभागों को करनी चाहिए।
अग्निशमन व्यवस्था की भी हो जांच
आग की घटना के बाद संस्थान में उपलब्ध अग्निशमन उपकरणों और उनकी कार्यशीलता की भी जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। केवल भवन में अग्निशमन उपकरण लगे होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपात स्थिति में उनका संचालन, नियमित रखरखाव और कर्मचारियों को दिए गए प्रशिक्षण की भी अहम भूमिका होती है।
यदि संस्थान में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है।
प्रशासन से 5 सीधे सवाल
- क्या अचार्य इंस्टीट्यूट की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का नियमित निरीक्षण किया गया है?
- क्या भवन में आपातकालीन निकास यानी इमरजेंसी एग्जिट की पर्याप्त व्यवस्था है?
- बिजली के मीटर के आसपास जनरेटर रखने की व्यवस्था सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं?
- क्या संस्थान में लगे अग्निशमन उपकरण चालू हालत में हैं और उनका नियमित रखरखाव होता है?
- क्या आग की इस घटना के बाद प्रशासन द्वारा संस्थान का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा?
अभिभावकों में चिंता, जांच की मांग
घटना की जानकारी सामने आने के बाद अभिभावकों में भी चिंता देखी जा रही है। उनका कहना है कि बच्चों को शिक्षण संस्थान भेजते समय सबसे पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होना जरूरी है। किसी भी संस्थान में पढ़ाई के साथ-साथ आग, बिजली और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
अभिभावकों ने मांग की है कि प्रशासन द्वारा अचार्य इंस्टीट्यूट की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल जांच कराई जाए। जांच में यदि किसी प्रकार की कमी या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
एक हादसा बना चेतावनी—अब प्रशासन की परीक्षा
अचार्य इंस्टीट्यूट की पार्किंग में लगी आग को भले ही समय रहते नियंत्रित कर लिया गया हो, लेकिन यह घटना एक बड़ी चेतावनी जरूर है। आज आग बिजली के मीटर तक सीमित रही, लेकिन यदि आग ऊपर के तल तक पहुंच जाती तो स्थिति कितनी भयावह होती, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
अब निगाहें मुंगेली प्रशासन पर हैं कि वह इस घटना को सामान्य मानकर आगे बढ़ता है या फिर इसे गंभीर चेतावनी के रूप में लेते हुए शहर के सभी निजी स्कूल, कोचिंग संस्थानों और अन्य शिक्षण परिसरों की अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक निरीक्षण कराता है।
बड़ा सवाल यही है—बच्चों की सुरक्षा में चूक होने के बाद कार्रवाई का इंतजार किया जाएगा या हादसा होने से पहले ही सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी?

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