जनभूमि–मुंगेली। नगर पालिका की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त घमासान देखने को मिल रहा है। नगरपालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला को नगरीय प्रशासन विभाग के उप सचिव द्वारा नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। यह नोटिस पीआईसी (परिषद की स्थायी समिति) की बैठक नियमित रूप से न लेने के आरोप में दिया गया है।नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई की तलवार लटकते ही शहर की सियासत गरमा गई है।

👉 क्या अध्यक्ष पद से हटाए जा सकते हैं? नगरपालिका अधिनियम क्या कहता है,कानूनी जानकारों के मुताबिक, नगरपालिका अधिनियम के तहत अध्यक्ष को सीधे हटाना आसान प्रक्रिया नहीं है। यदि किसी अध्यक्ष पर कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, नियमों की अनदेखी या प्रशासनिक विफलता के आरोप साबित होते हैं, तो राज्य सरकार कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांग सकती है।यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो शासन जांच के बाद कार्रवाई कर सकता है, जिसमें पद से हटाने (हटाए जाने) की प्रक्रिया भी शामिल है। हालांकि, इसके लिए उचित कारण, जांच प्रक्रिया और कई मामलों में सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होता है। यानी अंतिम निर्णय पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और प्रस्तुत जवाब पर निर्भर करता है—यह तत्काल या मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता।
👉 क्या जा सकती है कुर्सी?

मौजूदा हालात में यह कहना जल्दबाजी होगा कि अध्यक्ष की कुर्सी जाएगी या नहीं, लेकिन नोटिस के बाद खतरा जरूर बढ़ गया है। यदि विभाग को जवाब संतोषजनक नहीं लगा, तो आगे कड़ी कार्रवाई की राह खुल सकती है।
👉 अध्यक्ष का पलटवार—सीधा मंत्री पर निशानानोटिस का जवाब देते हुए अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पद से हटाने के लिए राजनीतिक षड्यंत्र रचा जा रहा है।शुक्ला ने दो टूक शब्दों में कहा—”अगर मुझसे इस्तीफा चाहिए तो सामने आकर मांगें, मैं खुद पद छोड़ दूंगा… लेकिन इस तरह प्रशासनिक दबाव बनाना लोकतंत्र के खिलाफ है।”
👉 सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस और निर्दलीय जनप्रतिनिधियों को हटाने के लिए सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
👉 राजनीतिक माहौल गरमायाइस पूरे घटनाक्रम के बाद मुंगेली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि विभाग अध्यक्ष के जवाब को कितना संतोषजनक मानता है और आगे क्या कार्रवाई होती है📌 फिलहाल सबसे बड़ा सवाल—क्या यह प्रशासनिक। कार्रवाई है या सियासी चाल, और क्या जाएगी अध्यक्ष की कुर्सी?

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