जनभूमि–मुंगेली// सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर बड़ी उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं होता, लेकिन मुंगेली जिले की तीन बेटियों ने यह कर दिखाया है। अपनी मेहनत, लगन और अटूट संकल्प के दम पर उन्होंने राज्य स्तर पर पहचान बनाते हुए पूरे जिले को गौरवान्वित किया है।
लोरमी विकासखंड के ग्राम डिंडोरी की प्रतिभाशाली बालिकाएं सोनम कैवर्त, श्वेता भास्कर और स्वाति पट्टा का चयन वर्ष 2026-27 के लिए बिलासपुर स्थित स्वर्गीय बी.आर. यादव राज्य प्रशिक्षण केंद्र, बहतराई की आवासीय कबड्डी अकादमी में हुआ है। यह उपलब्धि न केवल इन बेटियों की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई है।
कलेक्टर कुंदन कुमार के मार्गदर्शन तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि ग्रामीण अंचलों की प्रतिभाएं अब बड़े मंच तक पहुंच रही हैं। इन बेटियों के माता-पिता कृषि एवं मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों के सपनों को हमेशा प्राथमिकता दी।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
इन तीनों खिलाड़ियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। सीमित संसाधनों के बीच निरंतर अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उनकी यह सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
अकादमी में मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण
कबड्डी अकादमी में चयनित खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें—
- सुरक्षित एवं व्यवस्थित आवास
- संतुलित एवं पौष्टिक आहार
- आधुनिक खेल सामग्री
- एनआईएस प्रशिक्षित अनुभवी कोचों का मार्गदर्शन
- शिक्षा जारी रखने की सुविधा
- फिटनेस के लिए विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट की सेवाएं
शामिल हैं, जिससे खिलाड़ियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।
बेटियों की सफलता बनी प्रेरणा
इन बेटियों की उपलब्धि जिले के अन्य युवाओं, विशेषकर बालिकाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सफलता संदेश देती है कि यदि सही अवसर और प्रोत्साहन मिले, तो ग्रामीण और जनजातीय अंचलों की बेटियां भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
मुंगेली की इन होनहार बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि सपनों की उड़ान के लिए आसमान नहीं, हौसले बड़े होने चाहिए।

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