मुंगेली। मुख्यमंत्री के मुंगेली आगमन और प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम को लेकर पूरे जिले में भव्य तैयारियां की जा रही हैं। शहर के चौक-चौराहे रंग-बिरंगी रोशनी, स्वागत द्वार, विशाल मंच और बड़े-बड़े होर्डिंग्स से सज चुके हैं। प्रशासन कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने में जुटा हुआ है, लेकिन इन चमक-दमक के बीच एक सवाल फिर जनता के बीच गूंजने लगा है — आखिर कटघोरा–मुंगेली–कवर्धा–डोंगरगढ़ रेल लाइन परियोजना कब पूरी होगी?
जनता के बीच चर्चा के प्रमुख बिंदु
🔸 वर्षों पुराना सपना अब भी अधूरा
मुंगेली जिले के लोगों को वर्षों से उम्मीद थी कि रेल लाइन आने से क्षेत्र का विकास नई रफ्तार पकड़ेगा। लेकिन हर चुनाव में घोषणा और हर दौरे में आश्वासन मिलने के बावजूद परियोजना अब भी अधूरी पड़ी हुई है।
🔸 “ट्रिपल इंजन सरकार” पर उठ रहे सवाल
प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार, जिले से केंद्रीय राज्य मंत्री , प्रदेश में उपमुख्यमंत्री और जिन क्षेत्रों से रेल लाइन गुजरनी है वहां भी भाजपा के मंत्री-विधायक होने के बावजूद परियोजना की धीमी रफ्तार लोगों को समझ नहीं आ रही।
🔸 बिलासपुर लोकसभा और रेल लाइन की राजनीति
क्षेत्र में लोग व्यंग्य करते हुए कहते नजर आ रहे हैं कि बिलासपुर लोकसभा सीट से भाजपा के सांसद लगातार जीतते आ रहे हैं और चुनावी मंचों पर रेल लाइन के नाम की “माला” भी कई बार पहन चुके हैं, लेकिन आज तक पटरियों पर ट्रेन दौड़ती नजर नहीं आई।
जनता अब तंज कस रही है —
“नेताओं के गले में तो रेल लाइन की माला कई बार पड़ गई, लेकिन मुंगेली की धरती अब भी ट्रेन की सीटी सुनने को तरस रही है।”
🔸 करोड़ों स्वागत में, मूलभूत सुविधाएं अधूरी
एक ओर स्वागत मंचों और प्रचार-प्रसार में करोड़ों रुपये खर्च होते दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई गांवों और शहर के हिस्सों में सड़क, पेयजल, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति आज भी बदहाल है।
🔸 रेल लाइन से बदल सकती है तस्वीर
लोगों का मानना है कि यह रेल परियोजना शुरू होने से व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। किसानों को फसल परिवहन में सुविधा मिलेगी और युवाओं को रोजगार के नए रास्ते मिलेंगे।
🔸 चुनावी वादों पर जनता की नजर
हर चुनाव से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही कई घोषणाएं फाइलों में सिमट जाती हैं। अब जनता पूछ रही है —
“आखिर विकास का इंजन भाषणों में दौड़ेगा या जमीन पर भी दिखाई देगा?”
मुख्यमंत्री के दौरे और बड़े आयोजनों के बीच अब जिले में यह चर्चा तेजी से हो रही है कि जनता को केवल सजावट और मंच नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाला विकास चाहिए। लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से लंबित रेल लाइन परियोजना को आखिर कब वास्तविक गति मिलेगी।

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