जनभूमि–मुंगेली/पुराना बस स्टैंड स्थित एक निर्माणाधीन भवन को लेकर नगर पालिका की अतिक्रमण कार्रवाई बुधवार को हाईवोल्टेज विवाद मे बदल गई। मौके पर उस समय तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई जब नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला स्वयं स्थल पर पहुंच गए और कार्रवाई रोकते हुए पहले सीमांकन एवं नापजोख की मांग करने लगे। देखते ही देखते अध्यक्ष और अतिक्रमण अमले के बीच तीखी बहस शुरू हो गई तथा बड़ी संख्या मे लोग मौके पर जमा हो गए।
जानकारी के अनुसार उक्त भवन को लेकर पहले भी कथित बेजाकब्जे की शिकायत हुई थी, जिस पर नगर पालिका प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्रवाई की थी। इसके बाद भवन स्वामी न्यायालय पहुंचे। बताया जा रहा है कि न्यायालय से मिले निर्देशों के बाद ही दोबारा निर्माण कार्य शुरू कराया गया था।
इसी बीच खुद को नगरहित की लड़ाई लड़ने वाला बताने वाले एक समूह ने पुनः शिकायत दर्ज कराते हुए निर्माण को कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया, जिसके बाद अतिक्रमण दस्ता फिर कार्रवाई करने पहुंच गया।
“पहले सही नाप लीजिये, फिर तोड़ दीजिये”
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार्रवाई शुरू होते ही नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला अपनी कार लेकर मौके पर पहुंचे और वाहन खड़ा कर कार्रवाई रुकवाने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने हाथ जोड़कर अधिकारियों से कहा —“पहले पूरी तरह सही नाप लीजिये, संतुष्ट हो जाइये, उसके बाद यदि गलत निकले तो तोड़ दीजिये।”
मौजूद लोगों के अनुसार अध्यक्ष लगातार सीमांकन की बात करते रहे, लेकिन अतिक्रमण अमले की महिला अधिकारी वाहन हटाने और कार्रवाई जारी रखने की बात पर अड़ी रहीं। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया।
“क्या पूरे शहर मे सिर्फ यही बिल्डिंग दिख रही है?”
विवाद के दौरान रोहित शुक्ला ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा —
“मैं पूरे शहर का जनप्रतिनिधि हूं, जनता ने मुझे चुना है इसलिए मुझे मौके पर आना ही पड़ेगा। मैं नगर विकास के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन किसी भी नागरिक के साथ अन्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी।”
इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों से सीधा सवाल किया —
“क्या पूरे शहर मे सिर्फ यही एक बिल्डिंग आपको बेजाकब्जा नजर आ रही है? बाकी जगहों पर फैले अतिक्रमण पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?”
इस पर महिला अधिकारी ने बिलासपुर मुख्य मार्ग पर पाथ-वे निर्माण के दौरान चल रही कार्रवाई का हवाला दिया, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि दोनों मामलों की परिस्थितियां पूरी तरह अलग हैं।
“कमीशन नहीं तो शिकायत शुरू?”
पूरे घटनाक्रम के बीच नगर मे एक और चर्चा तेजी से फैलती रही। स्थानीय लोगों के बीच यह बात कही जाती रही कि भवन स्वामी द्वारा कथित रूप से “व्यक्तिगत कमीशन” नहीं दिए जाने के बाद ही शिकायतों और आपत्तियों का सिलसिला तेज हुआ। हालांकि इस संबंध मे किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन लगातार एक ही भवन को निशाना बनाए जाने से सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं।
“90 प्रतिशत सड़कें अतिक्रमण की शिकार”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मुंगेली नगर की अधिकांश सड़कें और सार्वजनिक स्थान वर्षों से अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे मे पूरे शहर मे फैले बड़े अतिक्रमणों को छोड़कर केवल एक भवन पर बार-बार कार्रवाई होना लोगों को चयनात्मक कार्रवाई जैसा प्रतीत हो रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन पूरे शहर मे समान रूप से अभियान चलाए तो उसे वास्तविक जनहित माना जाएगा, लेकिन चुनिंदा मामलों पर ही कठोरता दिखना कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है।
घटना के बाद पूरे शहर मे यही चर्चा रही कि आखिर यह कार्रवाई वास्तव मे जनहित मे थी या फिर इसके पीछे कोई और कारण काम कर रहा है।
नागरिक, व्यापारी,पत्रकार और राजनीतिक कार्यकर्ता भी पहुंचे
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या मे स्थानीय नागरिक, पत्रकार, कांग्रेस एवं भाजपा के कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद रहे। मौके पर मौजूद कई लोगों ने नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला की इस मांग को जायज़ बताया कि बिना स्पष्ट सीमांकन और मेजरमेंट के किसी भी निर्माण पर तोड़फोड़ की कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।

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