जनभूमि–मुंगेली/छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के विकास के लिए करोड़ों का बजट तो जारी कर देती है,लेकिन धरातल पर ठेकेदारों की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता इस विकास को आम जनता के लिए ‘जी का जंजाल’ बना देती है। ऐसा ही एक ताजा मामला मुंगेली नगर से सामने आया है,जहां उपमुख्यमंत्री और नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव की पहल पर स्वीकृत करोड़ों रुपए की योजना आज लोगों के लिए भारी मुसीबत का सबब बन चुकी है।
स्वागत द्वार के निर्माण के नाम पर नगर की मुख्य सड़कों को जिस तरह से खोदा गया है,उसने स्थानीय प्रशासन के दावों और ठेकेदार की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है।
3.63 करोड़ का बजट,सालभर बाद भी काम ‘आधा-अधूरा‘
नगर को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए प्रदेश सरकार के नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव ने अधोसंरचना मद से 3 करोड़ 63 लाख 73 हजार रुपए स्वीकृत किए थे। इस राशि से नगर के पांच मुख्य मार्गों पर भव्य स्वागत द्वारों का निर्माण किया जाना है।
ठेका और कार्य आदेश:नगर पालिका द्वारा निविदा जारी करने के बाद मेसर्स रूप केशरी कंस्ट्रक्शन को कार्य आदेश 30 जून 2025 को जारी किया गया था।
कछुआ चाल की हद:कार्य आदेश जारी हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन ठेकेदार की सुस्ती का आलम यह है कि सालभर में रायपुर रोड और नवागढ़ रोड पर मात्र दो द्वारों का निर्माण शुरू हुआ है, और वे भी आज तक आधे-अधूरे पड़े हैं।
आफत की बारिश में लोरमी मार्ग पर ‘मनमानी की खुदाई’
जब नगर के लोग पहले से ही आधे-अधूरे कामों से परेशान थे,तब ठेकेदार ने अपनी मनमानी की सारी हदें पार करते हुए बरसात के मौसम में लोरमी जाने वाले मुख्य मार्ग को खोद दिया।
कीचड़ और दलदल में तब्दील हुआ सर्विस रोड
मुख्य मार्ग को बंद करने के बाद ठेकेदार ने यातायात के लिए बाजू में एक अस्थाई सर्विस रोड तो बनाया, लेकिन उसमें भारी लापरवाही बरती गई
सर्विस रोड का निर्माण केवल मुरूम और गिट्टी डालकर खानापूर्ति के रूप में किया गया।
लगातार हो रही बारिश के कारण यह मुरूम अब पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुकी है।
दलदली सड़क पर भारी वाहन लगातार फंस रहे हैं,जिससे इस मार्ग पर घंटों लंबा जाम लग रहा है।
स्कूली बच्चे और ग्रामीण पैदल चलने को मजबूर,बस-ऑटो सेवाएं ठप
ठेकेदार की इस घोर लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता,विशेषकर ग्रामीण और स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है
“हमें अपने वाहनों को दूर ही छोड़ना पड़ता है। बच्चे स्कूल जाने के लिए और ग्रामीण अपने रोजमर्रा के काम के दुर्गम रास्ते में पैदल चलने को मजबूर हैं। समझ नहीं आता यह स्वागत द्वार बन रहा है या हमारे लिए परेशानी का द्वार।”
आक्रोशित स्थानीय निवासी
परिवहन व्यवस्था ठप:भारी वाहनों के साथ-साथ बसों और ऑटो का आवागमन इस मार्ग पर पूरी तरह बंद हो चुका है।
यात्रियों की फजीहत:मुसाफिरों को बस पकड़ने के लिए दुर्गम रास्तों के बीच पैदल चलकर इस पार से उस पार जाना पड़ रहा है। बुजुर्गों,महिलाओं और मरीजों के लिए यह स्थिति किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है।
मूकदर्शक बना प्रशासन:मनमानी ठेकेदार की,बदनामी सरकार की!
जनता के मन में उठ रहा सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ठेकेदार को अच्छे से पता था कि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है,तो इस कार्य को बारिश के बाद क्यों शुरू नहीं किया गया? आखिर ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि जनता को इस नारकीय स्थिति में धकेल दिया गया?
सबसे ज्यादा नाराजगी जनप्रतिनिधि एवं नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन के रवैये को लेकर है। प्रशासन आखिर इस मनमानी पर मूकदर्शक क्यों बना हुआ है? क्यों संबंधित ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाकर यातायात की समुचित व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश नहीं दिए जा रहे हैं?
ठेकेदार अपनी जेबें भरने और मनमर्जी से काम करने में मस्त है,जिससे हो यह रहा है कि बदनामी शासन-प्रशासन की हो रही है। विकास कार्यों की आड़ में जनता को प्रताड़ित करने वाले इस रवैये पर यदि प्रशासन ने तुरंत संज्ञान नहीं लिया,तो आने वाले दिनों में जनता का यह आक्रोश उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।

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